तीन सस्पेंशन भी बेकार! कटनी मंडी में फिर सक्रिय ‘वसूली लॉबी’
Three suspensions proved useless! The ‘collection lobby’ is active again in Katni Mandi.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। मीडिया में फल-सब्जी मंडी शुल्क की रोजाना हो रही चोरी को लेकर खबरें सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कुछ सुधारात्मक फैसले लिए हैं। इनमें सबसे अहम निर्णय मंडी शुल्क प्रभारी विकास नारायण मिश्रा से वसूली का प्रभार छीनना और हर वाहन से शुल्क जमा होने के बाद ही मंडी परिसर में प्रवेश देने के नियम को सख्ती से लागू करना शामिल है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन बार अनियमितता और अनुशासनहीनता के मामलों में निलंबित हो चुके पूर्व वसूली प्रभारी विकास नारायण मिश्रा एक बार फिर कथित रूप से अपनी राजनीतिक पहुंच के सहारे कलेक्टर और मंडी सचिव पर दबाव बनाने में जुटे हैं, ताकि उन्हें दोबारा वसूली प्रभारी बनाया जा सके।
सूत्रों का दावा है कि गर्मी के मौसम में फल-सब्जियों की आवक बढ़ते ही एक बार फिर मंडी को हर माह लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने की जमीन तैयार की जा रही है।
गेट पर ही शुल्क जमा कराने के आदेश, कर्मचारियों को नोटिस
तीन दिन पहले कृषि उपज मंडी सचिव के.के. नरगावे ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि
फल-सब्जी से लदे ट्रकों का मंडी शुल्क अब अनिवार्य रूप से चेक पोस्ट (प्रवेश द्वार) पर ही जमा कराया जाएगा।
इस संबंध में आवक गेट प्रभारी—
- संतोष तिवारी
- राजेश मोहन तिवारी
- रघुवीर सिंह
- कुशराम
- सीताराम मार्को
(सभी मंडी सहायक उप निरीक्षक)
को नोटिस जारी कर बताया गया कि शिकायतकर्ता मंगलजीत सिंह भट्टी सहित अन्य माध्यमों से मंडी शुल्क चोरी और आढ़त-कटौती की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि—
- मंडी में आने वाले सभी ट्रकों से
- प्रचलित दरों पर
- इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा पर्ची के वजन के अनुसार
- गेट पर ही शुल्क जमा कराया जाए,
और किसानों से किसी भी प्रकार की अनावश्यक कटौती न की जाए।
इस अनियमितता को शत-प्रतिशत रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
मिश्रा के कार्यकाल में करोड़ों का घोटाला!
विवादित सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) विकास नारायण मिश्रा के कार्यकाल में निजी फल-सब्जी मंडी से जुड़े कारोबारियों द्वारा करोड़ों रुपये के मंडी शुल्क घोटाले किए जाने के आरोप लग चुके हैं।
उस दौर में मंडी की आय लगभग शून्य बताई गई थी।
साल 2022 में भी अवैध वसूली और मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
एक व्यापारी की शिकायत तत्कालीन विधायक संदीप जायसवाल तक भी पहुंची थी, जिस पर विधायक ने सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
जांच के बाद मिश्रा को निलंबित भी किया गया था।
लेकिन आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और साठगांठ के चलते मिश्रा को बाद में क्लीन चिट देकर फिर से वसूली का प्रभार सौंप दिया गया और इसके बाद कई वर्षों तक मंडी शुल्क अपवंचन का सिलसिला तेज गति से चलता रहा।
गेट पर वजन में खेल, प्रति ट्रक 5 टन तक की हेराफेरी!
किसानों और व्यापारियों द्वारा दी गई शिकायतों में बताया गया था कि—
मंडी के प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मचारी
बाहरी राज्यों से आने वाले फल-सब्जी से लदे ट्रकों का
वास्तविक वजन जानबूझकर कम दर्ज कर रहे हैं,
जिससे प्रति ट्रक लगभग 5 टन तक की हेराफेरी हो रही है।
कई मामलों में—
- कांटा पर्ची,
- बिल्टी
की जांच तक नहीं की जा रही।
गेट पास कर्मी, गार्ड और जांच टीम की मिलीभगत?
सूत्रों के अनुसार गेट पास कर्मियों, सुरक्षा गार्ड और जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरा खेल चल रहा था।
बताया जाता है कि बाद में आढ़तियों से कमीशन लिया जाता था।
मंडी शुल्क वसूली के लिए बनाई गई टीम के कुछ सदस्यों पर सुबह के समय ही बड़े पैमाने पर अनियमित वसूली के आरोप हैं।
अनिल तिवारी और गौतम नामक कर्मचारियों पर भी आढ़तियों से साठगांठ के आरोप लगाए गए हैं।
मंडी सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सीसीटीवी खराब, पर्ची 5 की… वसूली 20 की!
मंडी में रोजाना सब्जी, फल और अनाज से लदे बड़ी संख्या में ट्रक और छोटे वाहन पहुंचते हैं,
लेकिन निगरानी के लिए लगाया गया सीसीटीवी कैमरा लंबे समय से खराब बताया जा रहा है।
प्रवेश पर्ची की दर महज 5 रुपये होने के बावजूद
10 से 20 रुपये तक वसूली के आरोप सामने आए हैं।
बड़ा सवाल
जब मंडी में वर्षों से गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं,
तो फिर बार-बार विवादित अधिकारी को दोबारा कुर्सी सौंपने की कोशिश किसके इशारे पर हो रही है?
सरकारी राजस्व की खुली लूट और किसानों के शोषण के बीच
अब मंडी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है,
ताकि कटनी कृषि उपज मंडी में पारदर्शिता बहाल हो सके।