सीहोर में स्वास्थ्य सिस्टम कटघरे में, बच्चा देने से पहले पैसों की शर्त.
Sehore health system under scrutiny, money demanded before handing over the newborn.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Sehore, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, सीहोर। जिले के बुधनी में शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट सामने आ रही है।
बुधनी सिविल अस्पताल से जुड़ा एक बेहद गंभीर, अमानवीय और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नवजात ‘सौदे’ का आरोप
आरोप है कि सिविल अस्पताल बुधनी में डिलीवरी के बाद ड्यूटी पर तैनात दाई द्वारा प्रसूता के परिजनों से खुलेआम पैसों की मांग की गई।
प्रसूता निशा और उसके परिजनों ने इस संबंध में बुधनी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को लिखित शिकायत सौंपी है।
परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद दाई ने नवजात शिशु परिजनों को सौंपने से पहले 4,000 रुपये की मांग की।
जब परिजनों ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और पूरी राशि देने में असमर्थता जताई, तो दाई ने कथित रूप से नवजात शिशु देने से इंकार कर दिया।
1500 रुपये देने के बाद मिला बच्चा
गरीब और मजबूर परिवार ने किसी तरह 1500 रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उन्हें उनका नवजात शिशु सौंपा गया।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में उस समय कोई सुनवाई नहीं हुई और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
जांच के आदेश
मामले को लेकर जब अधिकारी डॉ. डी. बड़ोदिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने प्रकरण को गंभीर बताते हुए जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सरकारी अस्पताल में क्या अब बच्चों की डिलीवरी के बाद ‘डिलीवरी चार्ज’ नहीं, बल्कि ‘रिहाई शुल्क’ वसूला जाएगा?
बुधनी सिविल अस्पताल की यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।