चंबल बचाने उतरा प्रशासन, रेत माफियाओं के 5 हजार ट्रॉली स्टॉक पर कार्रवाई.

मुरैना। चंबल की धड़कन पर कब्जा जमाए बैठे रेत माफिया नेटवर्क पर आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक हमला बोल दिया है। राजघाट क्षेत्र में टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई में अवैध रूप से जमा हजारों ट्रॉली रेत को जेसीबी से नष्ट किया जा रहा है।
सिर्फ 5 घंटे में ही करीब 1000 ट्रॉली रेत मिट्टी में मिला दी गई, जबकि देर शाम तक करीब 5 हजार ट्रॉली रेत नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है। यह वही रेत है, जिसकी अवैध कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।
प्रतिबंधित इलाके में खुलेआम काला कारोबार
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा भंडारण राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य क्षेत्र में पाया गया, जहां रेत खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है। यही इलाका घड़ियाल, रिवर डॉल्फिन, कछुओं और दुर्लभ जलीय जीवों की आखिरी सुरक्षित शरणस्थली माना जाता है।
इसके बावजूद राजघाट और आसपास के घाटों पर लंबे समय से रेत माफिया खुलेआम चंबल को छलनी कर रहे थे।
सवाल – इतने बड़े भंडारण की जानकारी पहले क्यों नहीं?
पांच हजार ट्रॉली रेत का भंडारण कोई एक-दो दिन में नहीं हो जाता।
फिर सवाल उठता है कि—
इतने बड़े पैमाने पर रेत जमा होती रही और स्थानीय अमला आंख मूंदे क्यों बैठा रहा?
आखिर किसके संरक्षण में माफिया चंबल की रेत को करोड़ों में तब्दील करते रहे?
150 पुलिसकर्मी, 6 जेसीबी और पूरा प्रशासन मैदान में
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स की रणनीति के बाद आज सुबह 5 बजे से अभियान शुरू किया गया। वन विभाग ने पहले अवैध भंडारण स्थलों को चिन्हित किया और पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई शुरू हुई।
मौके पर
- 150 से अधिक पुलिसकर्मी,
- वन विभाग के लगभग 50 कर्मचारी,
- खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारी
लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं।
रेत को नष्ट करने के लिए 6 से अधिक जेसीबी मशीनें लगातार चल रही हैं।
क्या माफिया नेटवर्क तक पहुंचेगी कार्रवाई?
प्रशासन भले ही इसे बड़ी सफलता बता रहा हो, लेकिन असली सवाल अब भी बाकी है—
क्या यह अभियान केवल रेत नष्ट करने तक सीमित रहेगा, या रेत माफियाओं के पूरे नेटवर्क और संरक्षण देने वालों तक भी कार्रवाई पहुंचेगी?
चंबल को बचाने की यह लड़ाई तभी सफल मानी जाएगी, जब रेत के ढेर के साथ-साथ
माफिया और उनके सरपरस्त भी कानून के मलबे में दबाए जाएंगे।