डॉक्टर–दवा–दुकान की खतरनाक कड़ी, 30 मासूमों की मौत पर हाईकोर्ट की सख्त नजर.
The dangerous nexus of doctor, medicine, and pharmacy — High Court keeps a strict watch over the deaths of 30 innocent children.
Special Correspondent, Amit Singh, Chhindwara, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के बहुचर्चित और दिल दहला देने वाले जहरीले कफ सिरप कांड में गिरफ्तार चारों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार, 2 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी हो गई। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने इस मामले की 14वीं सुनवाई के दौरान आरोपियों, राज्य शासन और पीड़ित पक्ष की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि 30 मासूम बच्चों की मौत के इस मामले में आरोपी जेल में रहेंगे या उन्हें राहत मिलेगी।
पुलिस ने परासिया निवासी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उनके द्वारा लिखे गए पर्चे के आधार पर बच्चों को दिया गया कोल्ड्रिफ कफ सिरप जहरीला था, जिसके सेवन से जिले में 30 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि यह कफ सिरप डॉ. सोनी की पत्नी ज्योति सोनी के मेडिकल स्टोर से बेचा गया था।
इस मामले में परासिया की एडीजे कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2025 को डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पुलिस विवेचना में डॉ. सोनी की पत्नी ज्योति सोनी, उनके भतीजे राजेश सोनी और मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट सौरभ कुमार जैन को भी आरोपी बनाया गया। चारों के खिलाफ अलग-अलग जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और शशांक शेखर ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से अपर महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता सी.एम. तिवारी ने जमानत का कड़ा विरोध किया।
वहीं मृत बच्चों के परिजनों की ओर से आपत्तिकर्ता अश्मिता चांद की तरफ से अधिवक्ता के.के. पांडेय ने अदालत के सामने पक्ष रखा।
अब हाईकोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि 30 मासूमों की मौत के जिम्मेदारों पर कानून का शिकंजा कसता है या उन्हें जमानत के जरिए राहत मिलती है।