जर्जर स्कूल, जख्मी छात्र: शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर.
सागर के सरकारी स्कूल में जर्जर छत गिरने से घायल हुआ मासूम छात्र
Dilapidated School, Injured Student: Education Department’s Negligence Exposed
Special Correspondent, Amit Singh, Sagar, MP Samwad News.
MP संवाद, सागर। जिले से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। खुरई रोड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला गढ़ौली खुर्द में जर्जर भवन की छत से प्लास्टर गिरने के कारण दूसरी कक्षा में पढ़ने वाला 8 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। बच्चे के सिर में गहरी चोट आई है, जिसे इलाज के लिए सागर के भाग्योदय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों द्वारा जटिल ऑपरेशन किया जा रहा है। फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पढ़ाई के दौरान टूटी छत, मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, यह हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ। कक्षा में पढ़ाई चल रही थी, तभी अचानक छत से प्लास्टर गिरा और कक्षा में अफरा-तफरी मच गई। स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को बाहर निकाल दिया।
इसी दौरान घायल छात्र का कुछ सामान कक्षा में ही रह गया। जब वह दोबारा अपना सामान लेने कक्षा में गया, तभी छत की सीलिंग से प्लास्टर का बड़ा और भारी टुकड़ा सीधे उसके सिर पर गिर गया, जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
“फोन आया—बेटा खून से लथपथ था”
घायल बच्चे के पिता रामकेश बंसल ने बताया कि स्कूल से उन्हें फोन कर बेटे के घायल होने की सूचना दी गई। काम छोड़कर जब वे स्कूल पहुंचे, तो देखा कि उनका बेटा बुरी तरह जख्मी था और उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे।
हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही
यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में जर्जर स्कूल भवनों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने से ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जा रहे हैं।
गरीब और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वहां उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा, लेकिन गढ़ौली खुर्द प्राथमिक शाला की यह घटना शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाने की अनुमति किसने दी?
- भवन की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की गई?
- अगर हादसा कक्षा के भीतर पढ़ाई के दौरान होता, तो जिम्मेदार कौन होता?
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले। फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने किसी बैठक में व्यस्त होने की बात कहकर कॉल काट दी।
दावों और हकीकत के बीच फंसी बच्चों की जान
सरकारी स्कूलों को लेकर सरकारी विज्ञापनों में बेहतर भवन, सुरक्षित कक्षाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गढ़ौली खुर्द प्राथमिक शाला की यह घटना उन दावों की पोल खोल देती है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि छत का प्लास्टर क्यों गिरा,
सवाल यह है कि मासूम बच्चों को जानलेवा जर्जर भवन में बैठाने की जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करता है
या फिर यह मामला भी
कागजी जांच और औपचारिकताओं में दबा दिया जाएगा।