यूजीसी के नए नियमों पर उबाल: उज्जैन में सवर्ण समाज सड़कों पर.
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में उज्जैन में सवर्ण समाज का प्रदर्शन
Uproar Over New UGC Rules: Savarna Community Takes to the Streets in Ujjain.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Ujjain, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, उज्जैन। यूजीसी (UGC) के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन के खिलाफ देशभर में बढ़ते आक्रोश के बीच मध्यप्रदेश के उज्जैन में भी विरोध की चिंगारी सड़कों तक पहुंच गई। बुधवार शाम सवर्ण समाज के लोग टॉवर चौक पर एकत्र हुए और हाथों में तख्तियां लेकर यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूजीसी द्वारा एकतरफा तरीके से लाया गया यह ड्राफ्ट रेगुलेशन न तो छात्रों के हित में है और न ही शिक्षकों व शिक्षाविदों की राय को शामिल करता है। टॉवर चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताने के बाद सवर्ण समाज ने शहीद पार्क तक रैली निकाली और एसडीएम पवन बारिया तथा विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. शैलेन्द्र कुमार को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
“एकतरफा नीति नहीं चलेगी”
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही नीति निर्धारण से जुड़ी समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। समाज के लोगों का कहना था कि छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों से व्यापक संवाद किए बिना किसी भी नई शिक्षा नीति को लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
“उच्च शिक्षा में असंतुलन बढ़ाएंगे नए नियम”प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन उच्च शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक असंतुलन और भेदभाव को बढ़ावा देंगे। इन नियमों से सवर्ण वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जबकि शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए—न कि किसी एक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करना।
“यह नियम अन्याय की बेड़ियां हैं”
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश पुजारी ने कहा कि प्रस्तावित यूजीसी नियम सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए अन्यायपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, “यह नियम सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने और एक वर्ग को बेड़ियों में बांधने जैसे हैं।”
वहीं अर्पित गोयल ने सरकार से इस ड्राफ्ट को “काला कानून” बताते हुए वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि “सबसे अधिक कर, चंदा और सामाजिक जिम्मेदारियां सामान्य वर्ग निभाता है, इसके बावजूद सबसे ज्यादा असर भी उसी वर्ग पर डाला जा रहा है।”