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जल बजट भारी, जवाबदेही शून्य: इंदौर में ज़हरीले पानी से 21वीं मौत.

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Indore toxic water crisis causes 21 deaths due to contaminated drinking water

ज़हरीले पानी ने इंदौर में ली 21वीं जान, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Heavy water budget, zero accountability: 21st death from toxic water in Indore.

Special Correspondent, Ram Lakhan Yadav, Indore, MP Samwad News.

MP संवाद, इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 10 जनवरी 2026 को एक और महिला की मौत के बाद इस जल त्रासदी में अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही अब भी सवालों के घेरे में है।

मृतका की पहचान 50 वर्षीय सुनीता वर्मा, पति सतीश वर्मा के रूप में हुई है। वह पिछले तीन दिनों से एमवाय अस्पताल में भर्ती थीं। उपचार के दौरान उनकी किडनी डैमेज होने की पुष्टि हुई थी। रविवार को उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा।

दिसंबर से शुरू हुई थी तबाही की कहानी

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन के बाद उल्टी-दस्त के मामले सामने आने लगे थे। शुरुआत में हालात को मामूली बताकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह संकट महामारी जैसे हालात में बदल गया।

अब तक 400 से अधिक लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। लगातार हो रही मौतों के बाद यह मामला केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन चुका है। दबाव बढ़ने पर इंदौर नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन सवाल यह है—क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है?

मरीज घटे, लेकिन खतरा बरकरार

राहत की बात यह है कि अब नए मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है। शुक्रवार को डायरिया के 15 नए मामले सामने आए, जिनमें से दो को अस्पताल में भर्ती किया गया।

अब तक 414 मरीजों में से 369 को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल 45 मरीजों का इलाज जारी है, जिनमें से 11 की हालत गंभीर बताई जा रही है। चार मरीज वेंटिलेटर पर हैं और डॉक्टरों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

करोड़ों खर्च, फिर भी ज़हरीला पानी?

सबसे बड़ा सवाल इंदौर नगर निगम के खर्च और नतीजों को लेकर उठ रहा है। नगर निगम अपने कुल बजट का 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा केवल पानी और स्वच्छता पर खर्च करता है।

  • वर्ष 2021-22 में पानी व स्वच्छता पर खर्च: ₹1,680 करोड़
  • वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित खर्च: ₹2,450 करोड़
  • इसी अवधि में कुल नगर निगम बजट: ₹5,135 करोड़ से बढ़कर ₹8,200 करोड़ से अधिक

इतने भारी-भरकम बजट के बावजूद यदि शहरवासियों को ज़हरीला पानी मिल रहा है और जानें जा रही हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्थागत अपराध का मामला बनता है।

21 मौतें सिर्फ आंकड़ा नहीं, सिस्टम पर चार्जशीट

इंदौर की यह जल त्रासदी अब महज़ दुर्घटना नहीं रही। 21 मौतें नगर निगम, जल विभाग और स्वास्थ्य तंत्र के लिए सीधी चार्जशीट हैं। सवाल साफ है—
क्या इन मौतों की जिम्मेदारी तय होगी या हर बार की तरह फाइलें ठंडी पड़ जाएंगी?

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