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कलेक्टर साहब ध्यान दें! अस्पताल की लापरवाही से महिला ने गेट पर जन्मा बच्चा.

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Woman gave birth at Shivpuri hospital gate due to negligence, highlighting failure of Madhya Pradesh healthcare system – mpsamwad.com

Collector Sir, Take Note! Woman Gave Birth at Hospital Gate Due to Negligence.

Special Correspondent, Shivpuri, MP Samwad.

A shocking incident in Shivpuri exposed the failure of the health system when a woman gave birth at the hospital gate after being denied timely help. Despite pleas, staff delayed support over paperwork. The family blames negligence, while officials deny. The incident raises serious questions on Madhya Pradesh’s healthcare.

MP संवाद, शिवपुरी। मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक और काला धब्बा लग गया है। शिवपुरी जिला अस्पताल के बाहर एक महिला को चादर की आड़ में बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजन अस्पताल स्टाफ से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन लापरवाही और कागजी कार्रवाई में 20 मिनट बर्बाद हो गए।


गांव से जिला अस्पताल तक और फिर बेइज्जती

भौंती थाना क्षेत्र के दुल्हई गांव की रहने वाली चायना आदिवासी को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर पहले सिरसौद स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उसे शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन जिला अस्पताल पहुँचने के बाद भी मदद मिलने में देर हुई। परिवार के मुताबिक स्टाफ ने सिर्फ औपचारिकताओं में समय गंवाया।


चादर की ओट में प्रसव

जब तक स्टाफ पहुँचा, महिला की हालत बिगड़ चुकी थी। मजबूर होकर गांव की महिलाओं ने चादर की ओट बनाकर अस्पताल गेट पर ही डिलीवरी कराई। इस दौरान पुरुष सदस्य अंदर डॉक्टरों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने तुरंत ध्यान नहीं दिया।


जिम्मेदारों की सफाई और हकीकत

घटना पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बी. एल. यादव ने दावा किया कि बच्चे का जन्म एंबुलेंस में हुआ था, अस्पताल के बाहर नहीं। उन्होंने कहा कि जच्चा-बच्चा को तुरंत भर्ती कर लिया गया और दोनों सुरक्षित हैं।
हालांकि, सामने आई तस्वीरों में एंबुलेंस अस्पताल गेट पर खड़ी दिख रही है और महिलाएं एंबुलेंस के बाहर चादर ताने हुए हैं। यह प्रशासन की सफाई पर सवाल खड़े करती है।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

परिजनों का कहना है कि यह भगवान की कृपा थी कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। वरना लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है—अस्पताल की यह ढर्रा बनी हुई लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है।

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