स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही या मिलीभगत? बंद अस्पताल को मिली सरकारी मदद.
Negligence or Collusion by the Health Department? Closed Hospital Received Government Aid.
Harishankar Parashar, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
A shocking scam in Madhya Pradesh’s healthcare system has surfaced. A hospital that officially shut down in April 2025 continued to receive aid from the CM Relief Fund even in May. Former minister Jaywardhan Singh exposed how ₹48.7 lakh was fraudulently disbursed. The case questions transparency and official accountability.
MP संवाद, भोपाल। प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था में गहराई तक फैली गंभीर खामियों को उजागर करते हुए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि गुना जिले के मक्सूदनगढ़ में भोपाल लिंक अस्पताल के नाम पर फर्जी तरीके से संचालित एक अस्पताल को बीते 10 महीनों में मुख्यमंत्री राहत कोष से 48 लाख 70 हजार रुपए की फर्जी सहायता राशि जारी की गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल अप्रैल 2025 में बंद हो चुका था, फिर भी मई में सहायता राशि जारी कर दी गई।
पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह का आरोप है कि राजेश शर्मा नामक अस्पताल संचालक ने सीएम रिलीफ फंड के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 50 लाख रुपए की राशि निकाल ली। जांच में सामने आया कि जिस अस्पताल के नाम पर सहायता ली गई, वह अस्तित्व में ही नहीं था। कई मरीजों के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया, जिनका असल में न तो कोई इलाज हुआ और न ही उन्होंने सहायता के लिए आवेदन किया था।
बैरसिया क्षेत्र के मरीजों के नामों का गलत इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया गया। दो ऐसे मरीजों के नाम भी सामने आए जिन्होंने कभी कोई आवेदन नहीं किया, फिर भी उनके नाम पर सहायता राशि स्वीकृत की गई।
गुना के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जब मामले में सवाल उठे, तो अगले ही दिन जांच के आदेश दिए, जिसमें स्पष्ट हुआ कि अस्पताल का कोई अस्तित्व नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल संचालक राजेश शर्मा ने 4 अप्रैल 2025 को अस्पताल बंद करने का आवेदन जमा किया था। लेकिन अप्रैल के बाद भी सहायता राशि निर्गत होती रही, जो प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी मिसाल है।
जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में सवाल उठाया कि जब अस्पताल बंद हो चुका था, तो CMHO ने किस आधार पर इसे अनुमति दी? उन्होंने कहा कि वे इस घोटाले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखेंगे और राजेश शर्मा पर धोखाधड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेशभर में इस प्रकार के कई फर्जी डॉक्टर और अस्पताल सक्रिय हैं, जो गरीबों के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।