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अब नया अभ्यारण्य वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर होगा, 1.41 लाख हेक्टेयर में होगी बाघों की टेरेटरी

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भोपाल – टाइगर स्टेट का खिताब लगातार दूसरी बार कायम रखने वाले मध्यप्रदेश के लोगों को अब एक और टाइगर रिजर्व की सौगात मिल गई है। यह नया टाइगर अभ्यारण्य वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर के नाम से जाना जाएगा। यह टाइगर रिजर्व सागर जिले के नौरादेही और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर बना है। जिसमें नौरादेही वन्यजीव व दमोह वन मंडल मुख्य रूप से शामिल है। इस टाइगर रिजर्व के बाद मध्यप्रदेश में अब कुल सात टाइगर रिजर्व हो गए हैं।

वन महकमे द्वारा इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है जो प्रभावशील हो गया है। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के केंद्र के पास भेजा था। केंद्र की ओर से सहमति जारी की गई है। इस रिजर्व में सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले के राजस्व और वन ग्राम शामिल किए गए हैं। टाइगर रिजर्व में दो कोर एरिया तय किए गए हैं। पहले कोर एरिया में 1390.031 वर्गकिमी और दूसरे कोर एरिया में 23.97 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल किया गया है। इस तरह रिजर्व में कुल रकबा 141400.860 हेक्टेयर शामिल किया गया है।

राजस्व से ज्यादा निजी भूमि अधिग्रहण में फंसेगा पेंच

टाइगर रिजर्व में पहले से जिन ग्रामों को विस्थापित कैटेगरी में शामिल किया गया है उसमें उन राजस्व और वन ग्रामों की राजस्व और निजी भूमि शामिल है। निजी भूमि के लिए सरकार को ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी। इनमें बरपानी गांव की 90.600 हेक्टेयर, तरा की 256.550, भडरा की 250.680, करनपुर की 72.680, मढ़िया की 91.800, बंधा की 95.060, बिजनी वन ग्राम की 50.02, कुसुमी लगरा की 426.880, तिंदनी की 86.90, खापा की 90.61, महका की 88.32 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इसके अलावा सिंगपुुरी जामुन झिरी की 142.00, जामुन हटरी की 94.63, महगवां की 158.25, आमापानी की 102.513 हेक्टेयर भूमि से विस्थापन हो चुका है। कुल 2130.593 हेक्टेयर राजस्व और वन ग्राम की भूमि विस्थापन प्रक्रिया पूरी करना बताई गई है।

16722 हेक्टेयर भूमि का होगा विस्थापन

सरकार द्वारा किए गए नोटिफिकेशन से पता चलता है कि अभी 52 ग्रामों की 16722.679 हेक्टेयर जमीन से विस्थापन का काम किया जाना बाकी है। इस टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में 81 ग्राम आएंगे। रिजर्व एरिया घोषित होने के बाद इस क्षेत्र में वन्य जीवों के संरक्षण, वृद्धि और विकास के प्रयोजन को पूरा करने में मदद मिल सकेगी। यहां की पारिस्थितिकी भी टाइगर रिजर्व घोषित होने में सहायक बनी है।पहले 6 टाइगर रिजर्व, अब हुए 7- इस प्रदेश में पहले से छह टाइगर रिजर्व हैं और नए टाइगर रिजर्व के बनने के बाद इसकी संख्या सात हो गई है। प्रदेश में पहले से कान्हा नेशनल पार्क मंडला, बांधवगढ़ नेशनल पार्क उमरिया, पन्ना टाइगर रिजर्व,, पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम और संजय गांधी डुबरी नेशनल पार्क शामिल हैं। इन टाइगर रिजर्व के कारण प्रदेश में सैलानियों की संख्या में भी पिछले सालों में तेजी से इजाफा हुआ है।

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